Peer review week in Hindi

हिंदुस्तानी विश्वविद्यालयों में कार्यरत लोगों पर दबाव आ रहा है कि वह पश्चिम की नकल करें.


हिंदी के लेखों को भी पश्चिमी (चर्च)  की विधि से गुप्त रूप से छपने के पहले लेखों की समीक्षा करनी चाहिए.

अब भाषा चाहे कोई भी हो अगर हम पश्चिम की नकल करते हैं तो कुछ ऐसा ही होता है जो इस  वेबीनार में हुआ, मेरे नाम को दो भागों में बांट दिया क्योंकि विकिपीडिया प्रमाणिक है ना कि मेरे द्वारा बताया गया मेरा नाम!  कभी सुना है हिंदी में चंद्रकांत को दो भागों में बांट दिया? पश्चिम के अंधाधुन नकल करने से ऐसा ही होता है.

हिंदुस्तानी परंपरा बेहतर थी क्योंकि यह सार्वजनिक वाद विवाद पर टिकी थी.

इस विषय पर मेरे वक्तव्य का वीडियो यहां है.

वक्तव्य के समय कुछ चित्र दिखा नहीं पाया वे यहां है.


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